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WDM-2 डीज़ल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव

WDM2 डीजल इलेक्ट्रीक लोकोमोटिव
W- ( wide line) बडी लाईन
D- डीजल लोकोमोटिव
M-मिक्सड सव्रिस (सवारी तथा मालगाडी)
2- मॉडल नं.

WDM2 लोकोमोटिव यह बडी लाईन पर चलने वाला, सवारी तथा
मालगाडी के लिये बनाया गया डीजल लोकोमोटिव है।
इस लोकोमोटिव पर 251-B प्रकार का डीजल इंजिन लगा है। इस डीजल इंजिन के द्वारा जनरेटर को चलाकर बिजली प्राप्त की जाती है। इस बिजली के द्वारा ट्रॅक्शन मोटर चलाकर लेाकोमोटीव चलता है, इसलिए डीजल लोकोमोटिव यह इलेक्ट्रीकल ट्रांसमीशन लोकोमोटिव है । लोकोमोटिव में 28 LAV1 यह ड्युल ब्रेक सिस्टम लगा है जिसके लिए एक्सप्रेशर लगा है ।                                लोकोमोटिव WDM2 लोको के मुख्यं भाग
1. नोज कंपार्टमेंट 2. लोको पायलट कॅब
3.कंट्रोल कंपार्टमेंट  4. जनरेटर रूम   5. इंजिन रूम
6. एक्सप्रेशर रूम. 7. रेडीएटर रूम


 

शॉर्ट हुड-लोकोमोटिव के नोज कंपार्टमेंट वाले सिरे.को शॉर्ट हुड कहते है।
लॉग हुड-लोकोमोटिव के रेडीएटर रूम वाले सिरे को लाँग हुड कहते है।
लोको राईट तथा लोको लेफ्ट- ड्राईवर कैब में खडें होकर नोज कंपार्टमेंट की तरफ मुंह करने पर अपने दाहिने हाथ का भाग लोको रांईट तथा बाये हाथ का भाग लोको लेफ्ट कहलाता है।
पावर टेकऑफ एंड-इंजिन रूम के जनरेटर लगे सिरे को पावर टेक ऑफ एंड कहते है ।
फ्री एंड-इंजिन-  रूम के एक्सप्रेशर लगे सिरे को फ्री एंड कहते है।
इंजिन राईट तथा इंजिन लेफ्ट-ड्रायवर कैब में खड़े होकर रेडीएटर रूम की तरफ मुंह करने पर अपने दाहिने हाथ का भाग इंजिन राईट साईड तंथा बाये हाथ का भाग इंजिन लेफ्ट साईड कहलाता है।
नोट-
1. जनरेटर रूम, इंजिन रूम और एक्सप्रेशर रूम के पुर्जो की गिनती इंजिन के लॅफ्ट तथा राईट के अनुसार होती है ।
2. इंजिन के पुर्ज़ों की गिनती फ्री एंड से पवर टेक ऑफ एंड की ओर की जाती है। लोकोमोटिव के पूजो की गिनती शॉर्ट हुड से लॉँग हुड की तरफ की जाती है।



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ट्रेडिशनल डीज़ल लोको और EMD लोको में अंतर

 ट्रेडिशनल साधारण लोको के अंतर्गत WDS6-R WDM-२, WDM-३ आते है। EMD के अंतर्गत WDP-४, WDG-4, WDG-4D लोकोमोटिव आते है।  इन दोनों लोको में बहुत अंतर है जो निम्नलिखित है। 1. साधारण लोको में चार स्ट्रोक कंप्रेशन ईगिनेशन इंजन लगा रहता है। जबकि EMD लोको में दो स्ट्रोक कंप्रेशन ईगिनेशन इंजन लगा रहता है।  नोट- ऐसा अन्तर्दहन इंजन जिसमें सक्शन , कंप्रेशन और एग्जॉस्ट की क्रियाएँ अथार्त एक क्रिया चक्र पिस्टन के दो स्ट्रोक में पूरी होती है। ऐसे इंजन को दो स्ट्रोक इंजन कहते हैं। पिस्टन के दो स्ट्रोक में क्रैंक शाफ़्ट एक पूरे चक्कर लगाती है।  2. साधारण लोको में इंजन को मेन जेनेरेटर या एक्साइटर/ ऑक्सीलियरी जेनरेटर को मोटर बनाकर स्टार्ट किया जाता है। जबकि EMD लोकोमोटिव में इंजन स्टार्ट करने के लिए अलग से दो स्टार्टिंग मोटर लगी है।  3. साधारण लोको में  फ्यूल का प्रेशर बढ़ाकर नोज़ल तक फ्यूल ल् जाने के लिये फ्यूल इंजेक्शन पंप लगे हुए है। जबकि EMD लोकोमोटिव में मेकैनिकली यूनिट टाइप फ्यूल इंजेक्टर लगे हैं। 

डीजल इंजन का कार्यचक्र

इंजन ऐसा यंत्र है जो उष्मा ऊर्जा शक्ति को यांत्रिक शक्ति में बदलता है। इंजिन में एक हवा बन्द(एयर टाइट) सिलिंडर और उसके अंदर एक पिस्टन और पिस्टन रॉड होता है। पहले स्टीम इंजन होता था उसके बाद डीजल इंजन बनाने का प्रयास वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, उत्तरोत्तर विकास के बाद जर्मन के वैज्ञानिक डॉ रुडॉल्फ डीजल ,जिनका जन्म 1837 ई. में हुआ था। रुडॉल्फ डीज़ल ने 1897 ई. में  एक डीजल इंजन बनाया। रुडॉल्फ डीज़ल ने कोयला और लिक्विड ईंधन से पावर उत्पन्न करने के तरीकों का एक इंजिन बनाया,, लेकिन यह इंजन सिलिंडर के अंदर  विस्फोट  होने के कारण नष्ट हो गया। लेकिन इस घटना के कारण रुडॉल्फ डीज़ल के कंप्रेशन इग्नीशन सिद्धांत सिद्ध हो गया था। अतार्थ कोयले की शक्ति को कंप्रेशड हवा में जलाने से अत्यधिक शक्ति उत्पन्न होती हैं। और इस प्रकार के इंजन में द्रव्य-रूपी फ्यूल का उपयोग किया जा सकता हैं।,इस सिद्धान्त के आधार ओर उन्होंने सन 1897 ई. में 20 हार्सपावर और एक सिलिंडर का एक सफल डीजल इंजन बनाया। सवर्प्रथम अमेरिका में व्यावसायिक रूप में 1898 ई. पहला इंजिन बनाया गया। यह इंजन 60 हॉर्स पॉवर और 2 सिलिंडर ...