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WDM-2 डीज़ल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव

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ट्रेडिशनल डीज़ल लोको और EMD लोको में अंतर

 ट्रेडिशनल साधारण लोको के अंतर्गत WDS6-R WDM-२, WDM-३ आते है। EMD के अंतर्गत WDP-४, WDG-4, WDG-4D लोकोमोटिव आते है।  इन दोनों लोको में बहुत अंतर है जो निम्नलिखित है। 1. साधारण लोको में चार स्ट्रोक कंप्रेशन ईगिनेशन इंजन लगा रहता है। जबकि EMD लोको में दो स्ट्रोक कंप्रेशन ईगिनेशन इंजन लगा रहता है।  नोट- ऐसा अन्तर्दहन इंजन जिसमें सक्शन , कंप्रेशन और एग्जॉस्ट की क्रियाएँ अथार्त एक क्रिया चक्र पिस्टन के दो स्ट्रोक में पूरी होती है। ऐसे इंजन को दो स्ट्रोक इंजन कहते हैं। पिस्टन के दो स्ट्रोक में क्रैंक शाफ़्ट एक पूरे चक्कर लगाती है।  2. साधारण लोको में इंजन को मेन जेनेरेटर या एक्साइटर/ ऑक्सीलियरी जेनरेटर को मोटर बनाकर स्टार्ट किया जाता है। जबकि EMD लोकोमोटिव में इंजन स्टार्ट करने के लिए अलग से दो स्टार्टिंग मोटर लगी है।  3. साधारण लोको में  फ्यूल का प्रेशर बढ़ाकर नोज़ल तक फ्यूल ल् जाने के लिये फ्यूल इंजेक्शन पंप लगे हुए है। जबकि EMD लोकोमोटिव में मेकैनिकली यूनिट टाइप फ्यूल इंजेक्टर लगे हैं। 

डीजल लोकोमोटिव के इंजन के चारो स्ट्रोक

डीजल इंजन दो प्रकार के होते है। 1. दो स्ट्रोक साईकल इंजन 2. चार स्ट्रोक साईकल इंजन चार स्ट्रोक साईकल इंजन इस प्रकार के इंजिनों में एक साईकल में चार स्ट्रोक होते है। ,ये चारों स्ट्रोक है। 1. सक्शन स्ट्रोक 2. कंप्रेशन स्ट्रोक  3. पावर स्ट्रोक 4. एक्जॉस्ट स्ट्रोक उपरोक्त चारो स्ट्रोक एक साईकल में ही सम्पन्न होती है। जब क्रैंक शाफ़्ट के दो चक्कर होते है। 1.सक्शन स्ट्रोक : - सिलिंडर में हवा भरने की क्रिया को सक्शन स्ट्रोक कहते है। इसमें पिस्टन टॉप डेड सेन्टर से बॉटम डेड सेंटर की तरफ चलता है उस वक्त सिलिंडर में उपस्थित इनलेट वाल्व खुल जाता है।,जिसके द्वारा वातावरण की वायु इनलेट वाल्व से होकर सिलिंडर में भर जाती है। इस स्ट्रोक के समय सिलिंडर का एक्जॉस्ट वाल्व बन्द रहते है।  2. कंप्रेसशन स्ट्रोक :- सिलिंडर में जब कंप्रेशन स्ट्रोक पूर्ण हो जाती है यानी सिलिंडर में हवा भरने की क्रिया पूरा हो जाती है तब सिलिंडर के इनलेट और एक्जॉस्ट वाल्व दोनो बन्द हो जाते है इसके बाद पिस्टन बॉटम डेड सेन्टर (BDC) से टॉप डेड सेन्टर (TDC) की तरफ जाने लगती है और पिस्टन सिलिंडर में भरी हुई हवा को दबाती है जि...

डीजल इंजन का कार्यचक्र

इंजन ऐसा यंत्र है जो उष्मा ऊर्जा शक्ति को यांत्रिक शक्ति में बदलता है। इंजिन में एक हवा बन्द(एयर टाइट) सिलिंडर और उसके अंदर एक पिस्टन और पिस्टन रॉड होता है। पहले स्टीम इंजन होता था उसके बाद डीजल इंजन बनाने का प्रयास वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, उत्तरोत्तर विकास के बाद जर्मन के वैज्ञानिक डॉ रुडॉल्फ डीजल ,जिनका जन्म 1837 ई. में हुआ था। रुडॉल्फ डीज़ल ने 1897 ई. में  एक डीजल इंजन बनाया। रुडॉल्फ डीज़ल ने कोयला और लिक्विड ईंधन से पावर उत्पन्न करने के तरीकों का एक इंजिन बनाया,, लेकिन यह इंजन सिलिंडर के अंदर  विस्फोट  होने के कारण नष्ट हो गया। लेकिन इस घटना के कारण रुडॉल्फ डीज़ल के कंप्रेशन इग्नीशन सिद्धांत सिद्ध हो गया था। अतार्थ कोयले की शक्ति को कंप्रेशड हवा में जलाने से अत्यधिक शक्ति उत्पन्न होती हैं। और इस प्रकार के इंजन में द्रव्य-रूपी फ्यूल का उपयोग किया जा सकता हैं।,इस सिद्धान्त के आधार ओर उन्होंने सन 1897 ई. में 20 हार्सपावर और एक सिलिंडर का एक सफल डीजल इंजन बनाया। सवर्प्रथम अमेरिका में व्यावसायिक रूप में 1898 ई. पहला इंजिन बनाया गया। यह इंजन 60 हॉर्स पॉवर और 2 सिलिंडर ...