इंजन ऐसा यंत्र है जो उष्मा ऊर्जा शक्ति को यांत्रिक शक्ति में बदलता है। इंजिन में एक हवा बन्द(एयर टाइट) सिलिंडर और उसके अंदर एक पिस्टन और पिस्टन रॉड होता है।
पहले स्टीम इंजन होता था उसके बाद डीजल इंजन बनाने का प्रयास वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, उत्तरोत्तर विकास के बाद जर्मन के वैज्ञानिक डॉ रुडॉल्फ डीजल ,जिनका जन्म 1837 ई. में हुआ था। रुडॉल्फ डीज़ल ने 1897 ई. में एक डीजल इंजन बनाया।
रुडॉल्फ डीज़ल ने कोयला और लिक्विड ईंधन से पावर उत्पन्न करने के तरीकों का एक इंजिन बनाया,, लेकिन यह इंजन सिलिंडर के अंदर विस्फोट होने के कारण नष्ट हो गया। लेकिन इस घटना के कारण रुडॉल्फ डीज़ल के कंप्रेशन इग्नीशन सिद्धांत सिद्ध हो गया था। अतार्थ कोयले की शक्ति को कंप्रेशड हवा में जलाने से अत्यधिक शक्ति उत्पन्न होती हैं। और इस प्रकार के इंजन में द्रव्य-रूपी फ्यूल का उपयोग किया जा सकता हैं।,इस सिद्धान्त के आधार ओर उन्होंने सन 1897 ई. में 20 हार्सपावर और एक सिलिंडर का एक सफल डीजल इंजन बनाया।
सवर्प्रथम अमेरिका में व्यावसायिक रूप में 1898 ई. पहला इंजिन बनाया गया। यह इंजन 60 हॉर्स पॉवर और 2 सिलिंडर का था।
इसी सिद्धांत पर आधारित 1923 ई. में प्रथम डीजल इंजन लोकोमोटिव बनाया गये जो व इंजन 1200 हार्सपावर के थे।
इंजन दो प्रकार के होते है।
1.एक्सटर्नल कॉम्बचन इंजन:- इसमे ईंधन का दहन सिलिंडर के बाहर होता है। पावर सिलिंडर के अंदर उत्पन्न होती है। उदाहरण :- स्टीम इंजन
2. इंटरनल कॉम्बचन इंजन :- इस तरह के इंजन में ईंधन का दहनसिलिंडर के अंदर ही होता हैं और शक्ति भी सिलिंडर के अंदर ही उत्पन्न होती है। जैसे:- डीजल इंजन , पेट्रोल इंजन।
इंटरनल कॉम्बचन इंजन (आंतरिक दहन इंजन) के दो प्रकार होते है।
1. स्पार्क इग्नीशन इंजन:- इस प्रकार के इंजन में वातावरण की हवा को ईंधन जे मिश्रण करके सिलिंडर के अंदर भेजा जाता हैं और गतिमान पिस्टन जे द्वारा प्रेशर बनाया जाता हैं। एक मानक दबाब पर इलेक्ट्रिक स्पार्क दिया जाता हैं जिसके बाद पावर उत्पन्न होती हैं।
2. कॉम्बचन इग्नीशन इंजन:- इस प्रकार के इंजिनों में छाना हुआ वातावरण की हवा सिलिंडर के अंदर भेजी जाती है जिसे पिस्टन के द्वारा कंप्रेस्ड किया जाता हैं इसके बाद सिलिंडर में हवा का दवाब और तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं उस वक्त सिलिंडर के अंदर भेजा गया फ्यूल जलने लगता है और पावर उत्पन्न होने लगती हैं। डीजल इंजन इसी प्रकार का इंजन है।
एक आंतरिक दहन कंप्रेशन (इंटरनल कॉम्बचन कंप्रेशन) के सिलिंडर में चार क्रियाएँ होती है।
(क). सक्शन
(ख). कंप्रेसशन
(ग) पावर
(घ) एक्जॉस्ट
उपरोक्त चारो क्रियाएँ जानने से पूर्व हमें सिलिंडर में लगे पिस्टन की कार्यप्रणाली को जानना होगा। पिस्टन की स्तिथि यानी वह किस पोजीशन में है। सिलिंडर में नीचे है या उपर है। इसे TDC और BDC के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
TDC :- (टॉप डेड सेन्टर) सिलिंडर में पिस्टन की वह ऊपरी स्तिथि जहाँ से पिस्टन ऊपर से नीचे की ओर जाना शुरू करती हैं।
BDC:- (बॉटम डेड सेन्टर ) सिलिंडर में पिस्टन की वह नीचे की स्तिथि जहाँ से पिस्टन नीचे से ऊपर की ओर जाना शुरू करती है।
(क) सक्शन:- सिलिंडर में वातावरण की हवा भरने की क्रिया को सक्शन कहाँ जाता है। जब सिलिंडर में पिस्टन टी.डी.सी (TDC) टॉप डेड सेन्टर से बॉटम डेड सेन्टर( BDC) की ओर जाता हैं।
सिलिंडर के अंदर ये चारों क्रियाएँ क्रमशः होती रहती है। ये चारों क्रियाएँ मिलकर एक सायकिल बनाती है। कुछ इंजिन यह चारो क्रियाएँ दो स्ट्रोक में पूर्ण करती है। अतः इस प्रकार के इंजन को दो स्ट्रोक इंजन कहते है।
कुछ इंजन में यह चारो क्रियाएँ चार स्ट्रोक में पूरा करती है। अतः इस प्रकार के इंजन को फ़ॉर स्ट्रोक इंजन कहते है।
1. इनलेट वाल्व ओपन होता है 63°48' पर TDC के पहले
इनलेट वाल्व बन्द होता है 29° 40' पर BDC के बाद
2. एग्जॉस्ट वाल्व ओपन होता हैं 41°28' पर BDC के पहले
एक्जॉस्ट वाल्व बैंड होता है 60° पर TDC के बाद
3. इंजेक्शन (तेल का झिड़काव) शुरू होता है 181/4° पर TDC
के पूर्व
4. इंजेक्शन (तेल का झिड़काव) बंद होता है 15° पर TDC के बाद
Scavenging process (स्कावनज़िंग प्रक्रिया )
डीज़ल इंजन में स्कावनज़िंग प्रोसेस का मतलब वैसा समय जब दोनों वाल्व अथार्त इनलेट वाल्व और आउटलेट वाल्व एक हो समय खिले रहे। यानी प्रॉपर रूप से हवा का प्रेसर होते रहे।
एग्जॉस्ट वाल्व भड़क के।पहुँचने के 41"28' पहके एक्जॉस्ट वॉकवे खुल जाएगा।
बैक प्रेसर नही हो इसलिए 41°28' मिनट पहले खुल जाता है।
इंजेक्शन शुरू होना :- फ्यूल धीरे धीरे जाता है। इंजेक्शन 35° तक जाता है।
वाल्व समय च्रक डायग्राम
वाल्व समय चक्र डायग्राम में यह दिखता है कि इनलेट और एक्जॉस्ट वाल्व के खुलने और बंद की स्तिथि क्या है। इसके साथ साथ क्रैंक शाफ़्ट के साथ फ्यूल के इंजेक्शन का समय क्या हैं।
पिस्टन:- क्रैंक शाफ़्ट के साथ चलता है। क्रैंक शाफ़्ट पावर कैर्री करता है।
क्रैंक शाफ़्ट दो स्ट्रोक इंजन में 1 बार और चार स्ट्रोक इंजिन में दो बार यानी 720° तक घूमता है।
अगले चैप्टर में डीजल इंजन के चारों स्ट्रोक सक्शन, कंप्रेशन,पावर(शक्ति) और एक्जॉस्ट के बारे में जानेंगे।
पहले स्टीम इंजन होता था उसके बाद डीजल इंजन बनाने का प्रयास वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, उत्तरोत्तर विकास के बाद जर्मन के वैज्ञानिक डॉ रुडॉल्फ डीजल ,जिनका जन्म 1837 ई. में हुआ था। रुडॉल्फ डीज़ल ने 1897 ई. में एक डीजल इंजन बनाया।
रुडॉल्फ डीज़ल ने कोयला और लिक्विड ईंधन से पावर उत्पन्न करने के तरीकों का एक इंजिन बनाया,, लेकिन यह इंजन सिलिंडर के अंदर विस्फोट होने के कारण नष्ट हो गया। लेकिन इस घटना के कारण रुडॉल्फ डीज़ल के कंप्रेशन इग्नीशन सिद्धांत सिद्ध हो गया था। अतार्थ कोयले की शक्ति को कंप्रेशड हवा में जलाने से अत्यधिक शक्ति उत्पन्न होती हैं। और इस प्रकार के इंजन में द्रव्य-रूपी फ्यूल का उपयोग किया जा सकता हैं।,इस सिद्धान्त के आधार ओर उन्होंने सन 1897 ई. में 20 हार्सपावर और एक सिलिंडर का एक सफल डीजल इंजन बनाया।
सवर्प्रथम अमेरिका में व्यावसायिक रूप में 1898 ई. पहला इंजिन बनाया गया। यह इंजन 60 हॉर्स पॉवर और 2 सिलिंडर का था।
इसी सिद्धांत पर आधारित 1923 ई. में प्रथम डीजल इंजन लोकोमोटिव बनाया गये जो व इंजन 1200 हार्सपावर के थे।
इंजन दो प्रकार के होते है।
1.एक्सटर्नल कॉम्बचन इंजन:- इसमे ईंधन का दहन सिलिंडर के बाहर होता है। पावर सिलिंडर के अंदर उत्पन्न होती है। उदाहरण :- स्टीम इंजन
2. इंटरनल कॉम्बचन इंजन :- इस तरह के इंजन में ईंधन का दहनसिलिंडर के अंदर ही होता हैं और शक्ति भी सिलिंडर के अंदर ही उत्पन्न होती है। जैसे:- डीजल इंजन , पेट्रोल इंजन।
इंटरनल कॉम्बचन इंजन (आंतरिक दहन इंजन) के दो प्रकार होते है।
1. स्पार्क इग्नीशन इंजन:- इस प्रकार के इंजन में वातावरण की हवा को ईंधन जे मिश्रण करके सिलिंडर के अंदर भेजा जाता हैं और गतिमान पिस्टन जे द्वारा प्रेशर बनाया जाता हैं। एक मानक दबाब पर इलेक्ट्रिक स्पार्क दिया जाता हैं जिसके बाद पावर उत्पन्न होती हैं।
2. कॉम्बचन इग्नीशन इंजन:- इस प्रकार के इंजिनों में छाना हुआ वातावरण की हवा सिलिंडर के अंदर भेजी जाती है जिसे पिस्टन के द्वारा कंप्रेस्ड किया जाता हैं इसके बाद सिलिंडर में हवा का दवाब और तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं उस वक्त सिलिंडर के अंदर भेजा गया फ्यूल जलने लगता है और पावर उत्पन्न होने लगती हैं। डीजल इंजन इसी प्रकार का इंजन है।
एक आंतरिक दहन कंप्रेशन (इंटरनल कॉम्बचन कंप्रेशन) के सिलिंडर में चार क्रियाएँ होती है।
(क). सक्शन
(ख). कंप्रेसशन
(ग) पावर
(घ) एक्जॉस्ट
उपरोक्त चारो क्रियाएँ जानने से पूर्व हमें सिलिंडर में लगे पिस्टन की कार्यप्रणाली को जानना होगा। पिस्टन की स्तिथि यानी वह किस पोजीशन में है। सिलिंडर में नीचे है या उपर है। इसे TDC और BDC के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
TDC :- (टॉप डेड सेन्टर) सिलिंडर में पिस्टन की वह ऊपरी स्तिथि जहाँ से पिस्टन ऊपर से नीचे की ओर जाना शुरू करती हैं।
BDC:- (बॉटम डेड सेन्टर ) सिलिंडर में पिस्टन की वह नीचे की स्तिथि जहाँ से पिस्टन नीचे से ऊपर की ओर जाना शुरू करती है।
(क) सक्शन:- सिलिंडर में वातावरण की हवा भरने की क्रिया को सक्शन कहाँ जाता है। जब सिलिंडर में पिस्टन टी.डी.सी (TDC) टॉप डेड सेन्टर से बॉटम डेड सेन्टर( BDC) की ओर जाता हैं।
सिलिंडर के अंदर ये चारों क्रियाएँ क्रमशः होती रहती है। ये चारों क्रियाएँ मिलकर एक सायकिल बनाती है। कुछ इंजिन यह चारो क्रियाएँ दो स्ट्रोक में पूर्ण करती है। अतः इस प्रकार के इंजन को दो स्ट्रोक इंजन कहते है।
कुछ इंजन में यह चारो क्रियाएँ चार स्ट्रोक में पूरा करती है। अतः इस प्रकार के इंजन को फ़ॉर स्ट्रोक इंजन कहते है।
1. इनलेट वाल्व ओपन होता है 63°48' पर TDC के पहले
इनलेट वाल्व बन्द होता है 29° 40' पर BDC के बाद
2. एग्जॉस्ट वाल्व ओपन होता हैं 41°28' पर BDC के पहले
एक्जॉस्ट वाल्व बैंड होता है 60° पर TDC के बाद
3. इंजेक्शन (तेल का झिड़काव) शुरू होता है 181/4° पर TDC
के पूर्व
4. इंजेक्शन (तेल का झिड़काव) बंद होता है 15° पर TDC के बाद
Scavenging process (स्कावनज़िंग प्रक्रिया )
डीज़ल इंजन में स्कावनज़िंग प्रोसेस का मतलब वैसा समय जब दोनों वाल्व अथार्त इनलेट वाल्व और आउटलेट वाल्व एक हो समय खिले रहे। यानी प्रॉपर रूप से हवा का प्रेसर होते रहे।
एग्जॉस्ट वाल्व भड़क के।पहुँचने के 41"28' पहके एक्जॉस्ट वॉकवे खुल जाएगा।
बैक प्रेसर नही हो इसलिए 41°28' मिनट पहले खुल जाता है।
इंजेक्शन शुरू होना :- फ्यूल धीरे धीरे जाता है। इंजेक्शन 35° तक जाता है।
वाल्व समय च्रक डायग्राम
वाल्व समय चक्र डायग्राम में यह दिखता है कि इनलेट और एक्जॉस्ट वाल्व के खुलने और बंद की स्तिथि क्या है। इसके साथ साथ क्रैंक शाफ़्ट के साथ फ्यूल के इंजेक्शन का समय क्या हैं।
पिस्टन:- क्रैंक शाफ़्ट के साथ चलता है। क्रैंक शाफ़्ट पावर कैर्री करता है।
क्रैंक शाफ़्ट दो स्ट्रोक इंजन में 1 बार और चार स्ट्रोक इंजिन में दो बार यानी 720° तक घूमता है।
अगले चैप्टर में डीजल इंजन के चारों स्ट्रोक सक्शन, कंप्रेशन,पावर(शक्ति) और एक्जॉस्ट के बारे में जानेंगे।
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